दीपावली
सोमवार, 1 नवंबर 2010
झिलमिल सितारों का आंगन होगा
यह ज्योति पर्व हर दिन हर पल हर घर व्दार पर बनाया जावें
अज्ञानान्धकार तब ही दूर होगा जब ज्ञानोदय होगा
ज्ञानोदय हो जाने दो चारो ओर ज्ञान ज्योत जल जाने दो
आओ कि अन्तर्मन की ज्योत जलाए
दीपावली-अपने घर का एक दीया पड़ौसी के घर भी जला दें
दीपावली-अपने घर का एक दीया पड़ौसी के घर भी जला दें
दीपमालिका के आंगन का एक दीप मेरे हृदय में जला दो
ज्योति पर्व प्रथमतः पूर्वोदय से प्रारंभ होता है
अखण्ड ज्योत केवल प्रेम की जलती है,बाकी सब बुझ जाती है
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